सोयाबीन में तेजी के पीछे कुछ तो गड़बड़ है

| Updated: Oct 14, 2015, 9:00 AM

[ राम सहगल | मुंबई ]सोयाबीन के वायदा भाव में हालिया तेजी गैरवाजिब है और कहीं कुछ गड़बड़ है। यह बात एक इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने कही है। हालांकि,...

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[ राम सहगल | मुंबई ]

सोयाबीन के वायदा भाव में हालिया तेजी गैरवाजिब है और कहीं कुछ गड़बड़ है। यह बात एक इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने कही है। हालांकि, दूसरों का मानना है कि इसमें तेज उतार-चढ़ाव आने की वजह एक्सचेंज के गोदाम में खाने-पीने की जरूरी चीजें रखने पर बांधी गई ऊपरी लिमिट है। सोयाबीन के वायदा भाव में आई तेजी गोदाम वालों के लिए बुरी खबर है क्योंकि दिवाली सिर पर है और इस दौरान मिठाइयों में यूज होने की वजह से खाने के तेल और चने की खपत बढ़ती है।

सोयाबीन के वायदा भाव में लगभग 20 पर्सेंट की तेजी पर अडानी ग्रुप के (एग्री बिजनेस) सीईओ अतुल चतुर्वेदी ने कहा, कीमतों में तेज उछाल बेमतलब है। ऐसा तब हुआ है, जब मध्य प्रदेश में रोजाना 60,000 से 70,000 टन की सामान्य आवक से ज्यादा नई फसल आ रही है। इसके साथ ही ग्लोबल मार्केट में इसकी कीमत कई साल के निचले लेवल पर है। तो क्या सोयाबीन की कीमत ऑपरेटर चढ़ा रहे हैं? इस सवाल के जवाब में चतुर्वेदी ने कहा, कहीं कुछ तो गड़बड़ है।

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री ने इस साल 85 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होने का अनुमान लगाया था जबकि सरकार ने इसके लिए 140 लाख टन का टारगेट फिक्स किया था, जो 100 लाख टन की सामान्य उपज से बहुत ज्यादा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि सोयाबीन प्रॉडक्शन पर उनका अपना अनुमान क्या है। गौरतलब है कि 9 सितंबर के बाद सोयाबीन का वायदा भाव 20 पर्सेंट चढ़कर पिछले शुक्रवार को 3782 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया था। इसी तरह कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX पर नवंबर डिलीवरी वाले चने का भाव 15 सितंबर से 17 पर्सेंट बढ़कर 5132 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया था।

इंडियन पल्स एंड ग्रेंस एसोसिएशन (IPGA) के चेयरमैन प्रवीन डोंगरे के मुताबिक चने के भाव में तेजी इस वजह से आई है क्योंकि राज्य सरकारों ने एक्सचेंज के गोदामों में खाने पीने के जरूरी सामानों के स्टॉक की ऊपरी लिमिट तय कर दी है। डोंगरे ने कहा कि पिछले गुरुवार को चने के भाव में असामान्य तरीके से 368 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई थी। इस पर उन्होंने कहा, डिलीवरी टूल से जुड़ा रिस्क हटने पर ऐसा नहीं होगा तो क्या होगा?‌ मार्केट के अफवाहों में फंसने का रिस्क बढ़ जाएगा और कीमतों में उतार चढ़ाव तेज हो जाएगा।

केंद्र सरकार ने सितंबर में दालों पर लगी स्टॉक लिमिट को 2016 तक के लिए एक साल बढ़ा दी थी। इसमें NCDEX जैसे कमोडिटी एक्सचेंजों के गोदामों में पड़ी खाने पीने की जरूरी चीजों को भी शामिल कर लिया। इससे पहले NCDEX से डिलीवरी वाले सामान पर स्टॉक लिमिट नहीं लगती थी। स्टॉक लिमिट तय करने का काम राज्य सरकारों का होता है।

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Web Title : Something is wrong behind the rise in soybeans
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